भगवान के सामने रोने का अर्थ

जब कोई व्यक्ति भगवान के सामने रोता है, तो यह सिर्फ दुख व्यक्त करने की क्रिया नहीं होती। यह एक ऐसी भावना है जब इंसान अपने सारे बलों से हारकर, टूटकर भगवान के द्वार पर आ जाता है। तब उसका आँसू नहीं, बल्कि उसकी आत्मा बोलती है।

रोने का मतलब है – अहंकार का टूटना, विश्वास का जागना, और भगवान के प्रति निर्भरता का एहसास। जब कोई इतना टूट जाता है कि सिर्फ भगवान के नाम पर आँसू बहाने लगे, तो उस पल उसके ऊपर दिव्य कृपा बरसने लगती है।

पुरानी कथाओं में कहा गया है – भगवान भी जब अपने भक्त को इतना दुखी देखते हैं, तो नंगे पैर दौड़कर उसकी रक्षा के लिए आते हैं। यह कोई कल्पना नहीं, बल्कि आस्था की गहराई है। वह रोना नहीं, जो नाटक हो, बल्कि वह आँसू जो दिल से निकले, वही भगवान तक पहुँचते हैं।

इसलिए, अगर कभी लगे कि सब खत्म हो गया है, तो बस भगवान के सामने आ जाओ। रो लेना। क्योंकि जिस आँसू में विश्वास होता है,

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