भगवान शिव ने ब्रह्मा जी का सिर क्यों काटा?

सनातन धर्म की पौराणिक कथाओं में भगवान शिव और ब्रह्मा जी से जुड़ी कई रहस्यमयी गाथाएं मिलती हैं। इन्हीं में से एक बेहद चर्चित प्रसंग है—भगवान शिव द्वारा ब्रह्मा जी का पांचवां सिर काटना। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सृष्टि के रचयिता का सिर काटने के पीछे क्या कारण था?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्रारंभ में ब्रह्मा जी के पांच सिर हुआ करते थे। एक बार ब्रह्मा जी में अहंकार आ गया और वे स्वयं को भगवान शिव से श्रेष्ठ समझने लगे। अपने इसी अभिमान के कारण ब्रह्मा जी का पांचवां सिर भगवान शिव के प्रति अनुचित और अपमानजनक बातें बोलने लगा। उन्होंने परमपिता शिव के स्वरूप और शक्तियों का अनादर किया।

जब ब्रह्मा जी का अहंकार और असत्य सीमा लांघ गया, तब संसार में धर्म और मर्यादा की रक्षा करने के लिए भगवान शिव अत्यंत क्रोधित हो गए। शिव जी ने अपने रौद्र रूप काल भैरव को प्रकट किया। भगवान काल भैरव ने अपने नाखून के प्रहार से ब्रह्मा जी के उस पांचवें सिर को धड़ से अलग कर दिया जो असत्य और अहंकार का प्रतीक बन चुका था।

इस घटना के बाद ब्रह्मा जी का अहंकार पूरी तरह चूर हो गया और उन्हें अपनी भूल का अहसास हुआ। यह कथा हमें सिखाती है कि अहंकार और असत्य व्यक्ति का विनाश करते हैं, चाहे वह कितना भी ज्ञानी या शक्तिशाली क्यों न हो।

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