भारत का अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कैसे सुगम हुआ है?
समय के साथ भारत का अंतर्राष्ट्रीय व्यापार बहुत आसान और तेज हो गया है, जिसके पीछे भौगोलिक और परिवहन से जुड़े कई अहम कारण हैं। आज वैश्विक बाजार तक पहुंचना पहले की तुलना में काफी सरल हो चुका है।
इस बदलाव में सबसे बड़ा योगदान 1869 में स्वेज नहर के खुलने का है। इस नहर के शुरू होने से भारत और यूरोप के बीच की समुद्री दूरी लगभग 7,000 किलोमीटर कम हो गई है, जिससे व्यापारिक जहाजों का समय और ईंधन दोनों की भारी बचत होती है।
समुद्री मार्ग के अलावा, पारंपरिक 'सर्कम अफ्रीका' जलमार्ग की तुलना में भी व्यापारिक मार्गों में सुधार हुआ है, जिससे यूरोप जाने वाले जहाजों के सफर में लगभग 6,500 किलोमीटर की कमी आई है।
आकाश मार्ग यानी एविएशन सेक्टर ने भी इसमें बड़ी भूमिका निभाई है। दुनिया के कई देशों को आपस में जोड़ने वाले प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय हवाई मार्ग भारत के विभिन्न हिस्सों से होकर गुजरते हैं। इससे न केवल माल की आवाजाही तेज हुई है, बल्कि वैश्विक स्तर पर व्यापारिक और व्यावसायिक संबंध भी मजबूत हुए हैं।
टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।