भारत की आर्थिक मजबूती और कम कर्ज का सच
हाल के वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था ने कई वैश्विक चुनौतियों के बावजूद अपनी स्थिति को काफी मजबूत बनाया है। दुनिया के कई देश जहां भारी कर्ज और आर्थिक मंदी के संकट से जूझ रहे हैं, वहीं भारत का विदेशी कर्ज स्थिति के हिसाब से काफी नियंत्रित और सुरक्षित स्तर पर है। इसका सबसे बड़ा कारण देश की बढ़ती विदेशी आय और बेहतर वित्तीय प्रबंधन है।
आर्थिक आंकड़ों के अनुसार, भारत का ऋण सेवा अनुपात (Debt Service Ratio) घटकर महज 5.2% पर आ गया है, जो पिछले 11 वर्षों का सबसे निचला स्तर है। ऋण सेवा अनुपात का मतलब उस राशि से है जो देश को अपनी कुल विदेशी कमाई में से कर्ज के ब्याज और मूलधन को चुकाने में खर्च करनी पड़ती है। जब यह अनुपात कम होता है, तो इसका सीधा मतलब है कि देश पर कर्ज चुकाने का दबाव काफी कम हो गया है।
इस सकारात्मक बदलाव के पीछे सबसे बड़ा योगदान भारत की चालू प्राप्तियों (Current Receipts) में आई जबरदस्त उछाल का है। वैश्विक व्यापार, निर्यात (Exports) और विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी के कारण देश की कुल विदेशी कमाई बढ़कर लगभग $798.7 बिलियन तक पहुंच गई, जो इससे पिछले वर्ष के $603.5 बिलियन से काफी अधिक है।
इस बढ़ती कमाई ने देश को एक मजबूत सुरक्षा कवच दिया है। मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और नियंत्रित कर्ज के कारण आज भारतीय अर्थव्यवस्था बाहरी वित्तीय झटकों को झेलने में पूरी तरह सक्षम है, जिससे वैश्विक निवेशकों का भरोसा भारत पर और गहरा हुआ है।
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