भारत पर राज्यों के कर्ज का बढ़ता बोझ

हाल के वर्षों में भारत के कई राज्यों पर वित्तीय दबाव तेजी से बढ़ा है। विकास योजनाओं, बुनियादी ढांचे के निर्माण और सामाजिक कल्याण की योजनाओं को चलाने के लिए राज्य सरकारों को बड़े पैमाने पर कर्ज लेना पड़ता है। हालांकि, यह कर्ज जब एक सीमा से अधिक हो जाता है, तो राज्य की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ने लगता है।

आंकड़ों के अनुसार, तमिलनाडु देश का सबसे ज्यादा कर्ज़दार राज्य बन चुका है। तमिलनाडु सरकार पर 6.59 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भारी-भरकम कर्ज है। दक्षिण भारत का यह प्रमुख औद्योगिक राज्य अपनी बड़ी विकास परियोजनाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं के कारण इस वित्तीय दबाव का सामना कर रहा है।

इस सूची में दूसरे स्थान पर देश का सबसे आबादी वाला राज्य उत्तर प्रदेश है। उत्तर प्रदेश पर 6.53 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज दर्ज किया गया है। राज्य का विशाल आकार और प्रशासनिक जरूरतें इसके मुख्य कारणों में से एक हैं।

चिंता की बात यह है कि यह समस्या केवल एक या दो राज्यों तक सीमित नहीं है। मार्च 2021 तक के आंकड़ों को देखें तो देश के कम से कम 19 राज्य ऐसे थे, जिन पर 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज था। अर्थव्यवस्था विशेषज्ञों का मानना है कि राज्यों को अपने राजस्व के स्रोत बढ़ाने और गैर-ज़रूरी खर्चों पर लगाम लगाने की सख्त जरूरत है ताकि भविष्य में आर्थिक संतुलन बना रहे।

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय