भारत का वैश्विक चावल बाजार में दबदबा

भारत दुनिया भर में कृषि उत्पादों का एक प्रमुख केंद्र है, और वैश्विक चावल व्यापार में इसकी भूमिका लगातार मजबूत हुई है। हालांकि पारंपरिक रूप से भारत अपनी घरेलू पैदावार और निर्यात के लिए जाना जाता है, लेकिन इसके अंतरराष्ट्रीय खरीदारों का दायरा समय के साथ काफी बदला है।

हालिया आंकड़ों के अनुसार, भारत ने वित्त वर्ष 2020-21 में कुल 212.10 लाख मीट्रक टन चावल का रिकॉर्ड निर्यात किया था। इस दौरान वैश्विक स्तर पर भारतीय चावल की मांग में जबरदस्त उछाल देखने को मिला।

दिलचस्प बात यह है कि एक समय जो देश टूटे चावल के लिए मुख्य रूप से अफ्रीकी देशों पर निर्भर था, वह अब बदल चुका है। कोरोना महामारी के इस चुनौतीपूर्ण दौर में चीन भारत के चावल का सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा है। चीन ने भारतीय कृषि बाजार से भारी मात्रा में चावल का आयात किया, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक समीकरणों में एक नया अध्याय जुड़ा।

यह बदलाव न केवल भारतीय किसानों और निर्यातकों के लिए आर्थिक रूप से अहम है, बल्कि यह वैश्विक खाद्य आपूर्ति श्रृंखला में भारत की बढ़ती अनिवार्यता को भी दर्शाता है।

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