भारत का विदेशी बहुपक्षीय ऋण और उसके मुख्य लेनदार
जब किसी देश को अपने बुनियादी ढांचे का विस्तार करना होता है या आर्थिक स्थिरता को बनाए रखना होता है, तो वह अक्सर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से वित्तीय मदद लेता है। भारत के मामले में, बहुपक्षीय ऋण (Multilateral Debt) देश के कुल विदेशी कर्ज का एक अहम हिस्सा है। आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च 2021 तक भारत पर कुल 69.7 बिलियन डॉलर का बहुपक्षीय ऋण था।
भारत को यह कर्ज देने वाली प्रमुख वैश्विक संस्थाओं में आईडीए (IDA), एशियाई विकास बैंक (ADB) और आईबीआरडी (IBRD) शामिल हैं। ये वित्तीय संस्थान भारत में बुनियादी ढांचे के निर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और ग्रामीण विकास से जुड़ी विभिन्न दीर्घकालिक परियोजनाओं के लिए रियायती दरों पर धन उपलब्ध कराते हैं।
कर्ज के इन आंकड़ों को समझते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से ली जाने वाली राशि को बहुपक्षीय ऋण में नहीं गिना जाता। इसे वित्तीय रिपोर्टिंग में आईएमएफ श्रेणी के तहत अलग से वर्गीकृत किया जाता है। वैश्विक स्तर पर यह उधारी देश के आर्थिक विकास और कल्याणकारी योजनाओं को गति देने में सहायक होती है।
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