भारत की पहली प्रभावशाली महिला शासक: महारानी दिद्दा

भारतीय इतिहास में कई साहसी वीरांगनाओं ने अपनी छाप छोड़ी है, लेकिन जब कश्मीर के प्रशासनिक और राजनीतिक इतिहास की बात आती है, तो महारानी दिद्दा का नाम सबसे प्रमुखता से उभरता है। दसवीं शताब्दी (958 ई. - 1003 ई.) में कश्मीर पर शासन करने वाली महारानी दिद्दा को भारत की सबसे कुशल और शक्तिशाली महिला शासकों में गिना जाता है।

महारानी दिद्दा लोहार वंश के राजा सिंहराज की पुत्री थीं और काबुल के हिन्दू शाही राजा भीम शाही की पोत्री थीं। उनका विवाह कश्मीर के राजा क्षेमगुप्त से हुआ था। दिद्दा का राजनीतिक प्रभाव इतना अधिक था कि राजा क्षेमगुप्त के शासनकाल में जारी किए गए तांबे के सिक्कों पर राजा के साथ महारानी दिद्दा का नाम भी अंकित किया जाता था।

पति के निधन के बाद महारानी दिद्दा ने पहले अपने पुत्र और पौत्रों की संरक्षिका के रूप में और बाद में स्वयं एकाधिकार शासक के रूप में लगभग चार दशकों तक कश्मीर की बागडोर संभाली। अपनी कूटनीति, दृढ़ इच्छाशक्ति और प्रशासनिक सूझबूझ के बल पर उन्होंने राज्य के आंतरिक विद्रोहों को समाप्त किया और साम्राज्य में स्थिरता स्थापित की। इतिहासकार कल्हण की प्रसिद्ध रचना राजतरंगिणी में भी महारानी दिद्दा के शासनकाल और उनकी असाधारण रणनीतिक क्षमताओं का विस्तृत वर्णन मिलता है।

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