भारत में गेहूं का इतिहास

भारत में कृषि का इतिहास बहुत प्राचीन है, लेकिन ऐतिहासिक साक्ष्यों से पता चलता है कि समय के साथ विभिन्न संस्कृतियों और यात्रियों के माध्यम से फसलों का आदान-प्रदान हुआ। चीनी यात्री इत्सिंग (671-695 ईस्वी) ने अपने यात्रा वृत्तांतों में भारत के पश्चिमी हिस्सों में गेहूं की भारी मात्रा और प्रचुरता का विशेष रूप से उल्लेख किया है।

इत्सिंग ने न केवल गेहूं की मौजूदगी दर्ज की, बल्कि उसकी दो खास किस्मों—मधुलिका और नंदीमुखी—का भी विस्तार से वर्णन किया है। हालांकि गेहूं भारत में उससे बहुत पहले से उगाया जाता रहा है (सिंधु घाटी सभ्यता के साक्ष्यों के अनुसार), लेकिन विदेशी यात्रियों के ऐसे लेख हमें प्राचीन कृषि पद्धतियों और व्यापारिक संपर्कों के बारे में बहुमूल्य जानकारी देते हैं।

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय