भारत की आर्थिक स्थिति और ब्रिटिश शासन: एक ऐतिहासिक नजर डालें
इतिहास के पन्नों को पलटें तो एक सवाल अक्सर सामने आता है कि कभी 'सोने की चिड़िया' कहलाने वाला भारत आखिर गरीब क्यों हो गया। इसका मुख्य कारण ब्रिटिश शासन के दौरान हुआ औपनिवेशिक शोषण और सुनियोजित विऔद्योगीकरण था।
ब्रिटिश काल से पहले भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ कृषि और पारंपरिक हस्तशिल्प का बेहतरीन मेल हुआ करती थी। यहाँ के कारीगरों द्वारा बनाए गए मलमल, रेशम और हस्तशिल्प उत्पादों की पूरी दुनिया में भारी मांग थी। लेकिन ब्रिटिश हुकूमत ने अपनी आर्थिक नीतियों के तहत भारत के पारंपरिक हस्तकला उद्योगों को धीरे-धीरे तबाह कर दिया।
ब्रिटेन के कारखानों में बने सस्ते मशीनरी सामानों को भारतीय बाजारों में थोपा गया और स्थानीय कारीगरों पर भारी कर (टैक्स) लगाए गए। इसके चलते देश के सदियों पुराने हस्तशिल्प उद्योग ठप हो गए और कुशल कारीगर बेरोजगार होकर पूरी तरह कृषि पर निर्भर होने के लिए मजबूर हो गए। इस प्रक्रिया ने भारत की अर्थव्यवस्था को गहरा आघात पहुँचाया और देश को भीषण गरीबी के दौर में धकेल दिया।
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