भारत में कृषि अनुसंधान और आईसीएआर का योगदान

भारत में कृषि अनुसंधान और शिक्षा का ताना-बाना अत्यंत मजबूत और विशाल है। देश भर में 101 आईसीएआर (ICAR) संस्थान और 71 कृषि विश्वविद्यालय फैले हुए हैं, जो इसे दुनिया की सबसे बड़ी राष्ट्रीय कृषि प्रणालियों में से एक बनाते हैं। यह विशाल नेटवर्क न केवल आधुनिक खेती की तकनीकों पर काम करता है, बल्कि देश के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों की जरूरतों के अनुसार समाधान भी प्रदान करता है।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने अनुसंधान, नई तकनीकों और उन्नत बीजों के विकास के माध्यम से भारत की कृषि व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। 1960 के दशक में हरित क्रांति की शुरुआत करने में आईसीएआर की मुख्य भूमिका रही है, जिसने देश को खाद्यान्न संकट से उबारकर आत्मनिर्भर बनाया। इसके बाद से लगातार, वैज्ञानिक नवाचारों और आधुनिक कृषि तकनीकों की मदद से, इसने फसल उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने में अग्रणी भूमिका निभाई है।

आज ये संस्थान और विश्वविद्यालय नई-नई तकनीकें विकसित कर रहे हैं—जैसे कि सूखा-रोधी फसलें, कीट प्रबंधन और सटीक खेती। यह शोध न केवल किसानों की आय बढ़ाने और उनकी लागत कम करने में मदद कर रहा है, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा को भी सुनिश्चित कर रहा है।

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