भारत में चीनी समुदाय: इतिहास और आबादी

भारत और चीन के बीच का संबंध केवल सरहदों और कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि सदियों पुराने सांस्कृतिक और मानवीय रिश्ते भी इसमें शामिल हैं। भारत में चीनी मूल के लोगों का इतिहास काफी दिलचस्प है, जिसकी जड़ें मुख्य रूप से ब्रिटिश राज के समय से जुड़ी हुई हैं।

ब्रिटिश औपनिवेशिक काल के दौरान, कई चीनी नागरिक काम की तलाश में या व्यापार के सिलसिले में भारत आए थे। समय के साथ, इनमें से अधिकांश लोग यहीं बस गए। उन्होंने भारतीय संस्कृति को अपनाया, यहाँ की नागरिकता हासिल की और यहीं के होकर रह गए। आज इनकी पीढ़ियाँ पूरी तरह से भारतीय समाज में घुल-मिल चुकी हैं।

वर्तमान अनुमानों के अनुसार, भारत में लगभग 189,000 जातीय चीनी लोग रहते हैं। इस आबादी में वे लोग शामिल हैं जो पूरी तरह से चीनी वंश के हैं या फिर 'चिंडियन' (Chindian) यानी भारत और चीन की मिश्रित वंशावली से ताल्लुक रखते हैं। इनमें से एक बड़ा समुदाय कोलकाता (पहले कलकत्ता) में बसा हुआ है, जहाँ आज भी ऐतिहासिक 'चाइनाटाउन' मौजूद है, जो इस समुदाय की अनूठी संस्कृति और खानपान को जीवित रखे हुए है।

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय