भारत में अमीरी और आर्थिक असमानता का असली चेहरा
भारत में अमीरी को लेकर अक्सर कई तरह के अनुमान लगाए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, देश की एक बहुत बड़ी आबादी आज भी बुनियादी वित्तीय सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रही है। आंकड़ों की मानें तो भारत में सिर्फ 9% लोगों के पास ही 10,000 डॉलर (लगभग 7.25 से 8 लाख रुपये) से अधिक की संपत्ति है। इसका सीधा और चिंताजनक मतलब यह है कि देश के लगभग 91% लोगों के पास इतनी बचत या पूंजी भी नहीं है कि वे निवेश या वित्तीय प्रबंधन के बारे में सोच सकें।
यह स्थिति भारत में गहरे स्तर पर मौजूद आर्थिक असमानता को दर्शाती है। आज देश के सबसे अमीर 1% लोगों के पास भारत की कुल संपत्ति का एक बहुत बड़ा हिस्सा है, जो देश के निचले पायदान पर मौजूद करीब 95 करोड़ लोगों की कुल जमा-पूंजी से भी कहीं अधिक है। यह खाई अमीर और गरीब के बीच के अंतर को लगातार चौड़ा कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस भारी असमानता का मुख्य कारण रोजगार के सीमित अवसर, कम वेतन और वित्तीय साक्षरता की कमी है। जब तक देश के बहुसंख्यक वर्ग की आय में सुधार नहीं होगा और उन्हें बेहतर संसाधन नहीं मिलेंगे, तब तक आर्थिक विकास का लाभ हर घर तक पहुँचना मुश्किल है। भारत को एक समृद्ध राष्ट्र बनाने के लिए इस बड़ी आबादी को आर्थिक रूप से सशक्त करना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।
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