भारत में गेहूं का इतिहास और खेती
गेहूं दुनिया की सबसे पुरानी और महत्वपूर्ण फसलों में से एक है। वैज्ञानिक रूप से ट्रिटिकम जाति के इस पौधे की खेती का इतिहास लगभग बारह हजार साल पुराना है। पुरातत्व शास्त्रियों के अनुसार, सबसे पहले गेहूं का इस्तेमाल लगभग 9600 ईसा पूर्व पश्चिम एशिया के क्षेत्रों में शुरू हुआ था।
समय के साथ गेहूं की विभिन्न किस्में तेजी से फैलीं। पश्चिम एशिया से यह फसल धीरे-धीरे उत्तरी अफ्रीका, यूरोप और पूर्वी एशिया तक पहुँच गई। बात करें भारत की, तो यहाँ भी गेहूं का उपयोग और इसकी खेती हजारों वर्षों से भारतीय कृषि संस्कृति का एक अहम हिस्सा रही है। सिंधु घाटी सभ्यता के समय से ही यहाँ के लोग गेहूं से परिचित थे और इसका नियमित सेवन करते थे।
आज भारत में गेहूं देश के प्रमुख खाद्यान्न में गिना जाता है, जो उत्तर भारत के राज्यों जैसे पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर उगाया जाता है। यह फसल न सिर्फ हमारी खुराक का मुख्य आधार है, बल्कि हमारी प्राचीन कृषि परंपराओं की कहानी भी बयां करती है।
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