भारत में चाय की कृषि का इतिहास

भारत में चाय की खेती का इतिहास काफी दिलचस्प और समृद्ध है। हालांकि शुरुआत में जंगली चाय के पौधों की मौजूदगी की चर्चा मिलती है, लेकिन एक संगठित उद्योग के रूप में इसकी असली शुरुआत औपनिवेशिक काल में हुई थी। विशेषज्ञों की सलाह और रिपोर्ट के आधार पर, साल 1837 में असम के चबुआ में देश का सबसे पहला चाय बागान लगाया गया था। यह ऐतिहासिक कदम भारत को वैश्विक चाय मानचित्र पर लाने वाला साबित हुआ।

इसके ठीक तीन साल बाद, यानी 1840 में, अंग्रेजों द्वारा स्थापित 'असम टी कंपनी' ने चाय का बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया। इसके बाद 1850 के दशक में भारतीय चाय उद्योग ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और इसमें अभूतपूर्व तेजी आई। देखते ही देखते सिर्फ 50 से 60 वर्षों के भीतर असम न केवल देश का बल्कि पूरी दुनिया का एक प्रमुख और अग्रणी चाय उत्पादक क्षेत्र बन गया, जिसकी महक आज पूरी दुनिया में महसूस की जाती है।

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय