मक्का मदीना में शैतान को पत्थर मारने की परंपरा
इस्लाम धर्म में पवित्र हज यात्रा का विशेष महत्व है। हज के दौरान कई महत्वपूर्ण धार्मिक रस्मों को पूरा किया जाता है, जिनमें से एक है शैतान को पत्थर मारना। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि मक्का मदीना में यह शैतान कौन है और यह परंपरा क्यों निभाई जाती है।
वास्तव में, हज यात्रा के दौरान मक्का के पास स्थित मीना (रमीजमारात) नामक स्थान पर यह रस्म निभाई जाती है। यहाँ पर कोई जीवित या वास्तविक शैतान नहीं होता, बल्कि तीन बड़े खंभे बने हुए हैं, जिन्हें प्रतीकात्मक रूप से शैतान का रूप माना जाता है। ईदु-उल-जुहा (बकरीद) के पावन पर्व पर हजयात्री यहाँ एकत्रित होते हैं और इन खंभों पर कंकड़ या पत्थर मारते हैं। यह सिलसिला लगातार तीन दिनों तक चलता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह परंपरा पैगंबर हजरत इब्राहिम के जीवन से जुड़ी है। जब वे अल्लाह के हुक्म पर अपने बेटे की कुर्बानी देने जा रहे थे, तब शैतान ने उन्हें बहकाने और रोकने की कोशिश की थी। हजरत इब्राहिम ने अल्लाह के प्रति अपनी निष्ठा दिखाते हुए शैतान को पत्थर मारकर भगा दिया था।
तभी से, बुराई पर अच्छाई की जीत और मन के भीतर के विकारों को दूर करने के प्रतीक के रूप में इन खंभों पर पत्थर मारने की रस्म निभाई जाती है। लाखों की भीड़ के कारण यह रस्म काफी चुनौतीपूर्ण मानी जाती है, लेकिन हर हाजी इसे पूरी श्रद्धा के साथ पूरा करता है।
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