मनमोहन सिंह सरकार के कार्यकाल में भारत का कर्ज
पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दौरान देश की आर्थिक नीतियों और कर्ज की स्थिति को लेकर अक्सर चर्चाएं होती रहती हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, उस दौर में देश पर कुल कर्ज का एक बड़ा हिस्सा आंतरिक और बाहरी स्रोतों से जुड़ा हुआ था।
आंकड़ों के मुताबिक, मनमोहन सरकार के समय में भारत पर लगभग 106.95 लाख करोड़ रुपये का आंतरिक (इंटरनल) कर्ज दर्ज किया गया था। यह वह कर्ज होता है जो सरकार देश के भीतर विभिन्न वित्तीय संस्थानों, बैंकों और बॉंड्स के जरिए जुटाती है। वहीं दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं और विदेशी स्रोतों से लिया गया बाहरी कर्ज 8.05 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा था।
किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने, बुनियादी ढांचे के विकास और जन-कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने के लिए सरकारें कर्ज का सहारा लेती हैं। डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में भी विकास कार्यों और आर्थिक संकटों से निपटने के लिए आंतरिक और बाहरी ऋण प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया था।
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