मनुष्य का प्रथम गुरु: माता

हमारे जीवन में शिक्षक और मार्गदर्शक तो बहुत आते हैं, लेकिन मनुष्य का सबसे पहला और सच्चा गुरु उसकी माता होती है। जन्म लेने के बाद बच्चा सबसे पहले अपनी माँ के संपर्क में आता है। वह माँ ही है जो हमें बोलना, चलना और संसार को समझना सिखाती है। एक माँ सिर्फ बच्चे का पालन-पोषण नहीं करती, बल्कि उसमें अच्छे संस्कार, नैतिकता और सही-गलत का भेद करने की समझ भी पैदा करती है।

दुनिया का कोई भी विद्यालय या विश्वविद्यालय वह ज्ञान नहीं दे सकता जो एक माँ अपनी ममता और अनुभवों से देती है। इतिहास गवाह है कि जितने भी महान पुरुष या वीरांगनाएं हुई हैं, उनकी सफलता के पीछे उनकी माताओं की दी हुई सीख का सबसे बड़ा हाथ रहा है। माता द्वारा बचपन में बोए गए संस्कार ही व्यक्ति के चरित्र की नींव बनते हैं।

इसलिए, हमारे शास्त्रों और संस्कृति में भी माता को भगवान से ऊपर का स्थान दिया गया है। जीवन के हर मोड़ पर भले ही हमें कई गुरु मिलें, लेकिन जो बिना किसी स्वार्थ के हमें जीवन जीना सिखाती है, वह माता ही है। माँ की सीख ही जीवन भर मनुष्य का मार्गदर्शन करती रहती है।

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय