मनुष्य का मूल और 'मानव' शब्द की उत्पत्ति
भारतीय पौराणिक मान्यताओं और प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, मानव जाति की उत्पत्ति के केंद्र में स्वायम्भुव मनु और उनकी पत्नी शतरूपा का स्थान सर्वोपरि है। इसके साथ ही, दक्ष प्रजापति (प्रथम) और उनकी पत्नी प्रसुति को भी होमो सेपियन्स यानी मानव जाति के आदि माता-पिता के रूप में स्वीकार किया गया है। इन्हीं के माध्यम से धरती पर मानवी चेतना और समाज का विस्तार हुआ।
भाषा और संस्कृति के दृष्टिकोण से देखें तो 'मानव' शब्द का अर्थ ही स्वायम्भुव मनु की संतान होता है। जिस प्रकार मनु से उत्पन्न होने के कारण हमें मानव कहा गया, उसी प्रकार यह शब्द हमारी प्राचीन जड़ों और वंशावली की याद दिलाता है।
इसी महान परंपरा में आगे चलकर चक्रवर्ती भरत का प्रादुर्भाव हुआ, जिनके नाम पर इस विशाल भू-भाग का नाम 'भारत' पड़ा। पौराणिक ग्रंथों में वर्णित 'मनुर्भरत' की अवधारणा के अनुसार, स्वायम्भुव मनु के वंशज और राजा भरत की संतान के रूप में भारतीय जनमानस मानव सभ्यता के एक गौरवशाली इतिहास का प्रतिनिधित्व करता है।
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