भगवान की इच्छा: आत्मसमर्पण और दिव्य प्रेम

मनुष्य के लिए भगवान की इच्छा क्या है, यह सवाल सदियों से धर्म, दर्शन और आध्यात्मिकता के केंद्र में रहा है। जवाब सरल है, पर गहरा है: भगवान चाहते हैं कि मनुष्य पूर्णतया उनके सामने झुक जाए — न कि डर के कारण, बल्कि प्रेम और विश्वास से।

वह चाहते हैं कि हम उनके साथ सहयोग करें, न कि एक दास की तरह, बल्कि एक पुत्र या पुत्री की तरह। सृष्टि के प्रति हमारा व्यवहार, जीव-जंतुओं के प्रति दया, प्रकृति के प्रति सम्मान — ये सब उसी सहयोग का हिस्सा हैं। भगवान की इच्छा नियंत्रण नहीं, बल्कि एक साझेदारी है।

एक अद्भुत सत्य यह भी है कि वह हमें बिना डांटे जीवन की हर चीज़ देने को तैयार हैं। जो कुछ भी हमें चाहिए — हमारी भलाई और उसकी महिमा के लिए — वह उदारता से देना चाहते हैं। बस शर्त यह है कि हम उस वादे पर टिके रहें जो उनके साथ हमारा संबंध परिभाषित करता है: प्रेम, विश्वास और सच्चाई।

तो भगवान की इच्छा क्या है? बस इतना कि हम उनके पास आएं

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