मर्द और औरत में अंतर: प्रकृति और समाज की दृष्टि से

मर्द और औरत में अंतर सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि भावनात्मक और सामाजिक स्तर पर भी होता है। प्रकृति ने दोनों को अलग भूमिकाएं दी हैं। शारीरिक रूप से मर्द आमतौर पर अधिक मांसपेशीय और ऊर्जावान होते हैं, जबकि औरतों के शरीर में गर्भधारण और संतान पैदा करने की क्षमता होती है। यह जैविक अंतर है, जो प्रजाति के अस्तित्व के लिए जरूरी है।

लेकिन सच तो यह है कि भावनाओं और व्यवहार में भी अंतर देखने को मिलता है। औरतें आमतौर पर अधिक संवेदनशील, सहानुभूति रखने वाली और भावनाओं को व्यक्त करने में स्वतंत्र होती हैं। वहीं, मर्दों को समाज में अक्सर भावनाएं दबाकर रखने की सीख दी जाती है—“मर्द को नहीं रोना चाहिए” की बात कई बार सुनने को मिलती है। यह वैसे तो एक सामाजिक रूढ़ि है, लेकिन यही धारणाएं अंतर को गहरा देती हैं।

हालांकि, आज के जमाने में ये अंतर धीरे-धीरे धुंधले हो रहे हैं। औरतें घर के बाहर काम कर

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय