मस्जिद: इबादत की जगह
मस्जिद में किसी देवी-देवता की पूजा नहीं होती। यह इस्लाम धर्म के अनुयायियों, यानी मुसलमानों का उपासना स्थल है। यहाँ वे अल्लाह की इबादत करते हैं। मुसलमान मानते हैं कि अल्लाह एक है और उनका कोई चित्र या मूर्ति नहीं है। इसलिए मस्जिद में कोई मूर्ति या प्रतिमा नहीं रखी जाती।
नमाज मस्जिद में एक साथ अल्लाह के सामने झुकने का तरीका है। इसे रोजाना पांच बार पढ़ा जाता है। खासकर जुमे के दिन लोग जमात के साथ ज्यादा संख्या में मस्जिद आते हैं। इमाम खुत्बा देते हैं और सभी एक साथ नमाज पढ़ते हैं।
मस्जिद केवल नमाज की जगह ही नहीं, बल्कि समुदाय के लिए एक केंद्र भी है। यहाँ लोग मिलकर धार्मिक बातचीत करते हैं, गरीबों की मदद करने की योजनाएँ बनाते हैं और त्योहारों की तैयारी करते हैं।
भारत जैसे बहुसांस्कृतिक देश में मस्जिदें सदियों से शांति और सहिष्णुता का प्रतीक रही हैं। अलग-अलग धर्मों के लोग एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करते हुए ए
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