शिक्षा और वर्धा योजना
महात्मा गांधी शिक्षा को मानव के सर्वांगीण विकास का सशक्त माध्यम मानते थे। अतः वर्धा योजना में उन्होंने प्रथम सात वर्षों की शिक्षा को निःशुल्क एवं अनिवार्य किये जाने पर बल दिया था।
गांधीजी का यह मानना भी था कि व्यक्ति अपनी मातृभाषा में शिक्षा को अधिक रुचि तथा सहजता के साथ ग्रहण कर सकता है।
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