मायके की तारीफ, लेकिन सीमा में

शादी के बाद हर लड़की के लिए मायका एक खास जगह होती है। प्यार, यादें, बचपन के पल – सब कुछ वहीं जुड़ा होता है। लेकिन कभी-कभी इस प्यार का इज़हार इतना ज़्यादा हो जाता है कि वो ससुराल में तनाव का कारण बन जाता है।

अति प्रशंसा का नुकसान

जब एक सुहागिन रोज़मर्रा की बातचीत में अपने मायके की ही बातें करे, तो ससुराल वालों को लगने लगता है कि वह उनके बीच अपनी नई ज़िंदगी को नहीं अपना रही। "हमारे घर तो ऐसा नहीं होता", "मेरे भैया तो बहुत समझदार हैं" – जैसी बातें कहते हुए वह अनजाने में ही अपने ससुराल वालों को नीचा दिखा देती है।

मायके वालों का आना

जब मायके वाले बेटी को देखने आते हैं, तो उसका रवैया अचानक बदल जाता है। वो छोटी बहन बन जाती है, माँ के पास बैठकर रोने लगती है, या फिर घर की बारीकियाँ लेकर शिकायत करने लगती है। इससे पति या सास-ससुर यह महसूस करते हैं कि लड़की अभी भी अपने मायके से ज़्यादा जुड़ी है और

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