मुकेश अंबानी और रतन टाटा: अमीरी और सादगी की अनूठी कहानी

जब भी भारत के सबसे सफल और प्रभावशाली उद्योगपतियों की बात होती है, तो मुकेश अंबानी और रतन टाटा का नाम सबसे पहले आता है। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि इन दोनों दिग्गजों में से आखिरकार सबसे ज्यादा अमीर कौन है? वित्तीय आंकड़ों और संपत्ति के लिहाज से देखें तो मुकेश अंबानी भारत के सबसे अमीर व्यक्ति हैं, जबकि रतन टाटा संपत्ति की इस दौड़ में उनसे काफी पीछे नजर आते हैं।

मुकेश अंबानी की अपार संपत्ति का मुख्य आधार रिलायंस इंडस्ट्रीज है, जो पेट्रोकेमिकल्स, टेलीकॉम (जियो) और रिटेल जैसे क्षेत्रों में दुनिया भर में अपना परचम लहरा रही है। वहीं दूसरी ओर, टाटा समूह का साम्राज्य भी बेहद विशाल है और टाटा संस के पास अनगिनत सफल कंपनियां हैं। फिर भी रतन टाटा की व्यक्तिगत संपत्ति कम होने की सबसे बड़ी वजह उनकी दानवीरता और समाज सेवा है।

रतन टाटा अपनी कमाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा टाटा चैरिटेबल ट्रस्ट्स के माध्यम से समाज कल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं के विकास में दान कर देते हैं। टाटा संस का लगभग 66% हिस्सा इन परोपकारी ट्रस्टों के पास है। यदि यह संपत्ति रतन टाटा के निजी खाते में होती, तो वे दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में शुमार होते। इसके विपरीत, मुकेश अंबानी अपनी आय का एक बड़ा हिस्सा अपने व्यावसायिक साम्राज्य के विस्तार और व्यक्तिगत संपत्ति में लगाते हैं। यही मुख्य कारण है कि नेट वर्थ की दौड़ में मुकेश अंबानी आगे हैं, जबकि रतन टाटा लोगों के दिलों पर राज करते हैं।

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय