मुस्लिम किसकी पूजा करते हैं?
इस्लाम धर्म में इबादत यानी पूजा को लेकर एक बहुत ही स्पष्ट और सीधा दृष्टिकोण है। मुस्लिम केवल और केवल अल्लाह की इबादत करते हैं। इस्लाम के मूल सिद्धांत, जिसे 'तौहीद' कहा जाता है, के अनुसार अल्लाह एक है, उसका कोई रूप या आकार नहीं है, और न ही उसका कोई साझीदार है। पूरे ब्रह्मांड में केवल वही एक परमेश्वर है जो हर तरह की स्तुति और पूजा के योग्य है।
अल्लाह के अलावा किसी भी अन्य शक्ति, मूर्ति, मनुष्य या प्रकृति की वस्तुओं की पूजा करना इस्लाम में पूरी तरह वर्जित माना गया है। मुस्लिम समुदाय का मानना है कि ईश्वर सर्वशक्तिमान है, वह हर जगह मौजूद है और हर इंसान की दुआओं को सीधे सुनता है। इसलिए, किसी भी माध्यम के बिना सीधे अल्लाह से ही प्रार्थना की जाती है।
इसके साथ ही, इस्लाम में हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का स्थान बेहद आदरणीय है। उन्हें अल्लाह का सबसे प्यारा और अंतिम रसूल (पैगंबर) माना जाता है। मुस्लिम उनका गहरा सम्मान करते हैं और उनके बताए रास्तों पर चलने की कोशिश करते हैं, लेकिन वे उनकी पूजा नहीं करते। पूजा केवल अल्लाह की होती है, और पैगंबर साहब को अल्लाह का बंदा और उनका संदेशवाहक माना जाता है। यही सरल और शुद्ध विश्वास इस्लाम की बुनियाद है।
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