चेरनोबिल: एक ऐतिहासिक परमाणु त्रासदी

यूक्रेन में स्थित चेरनोबिल परमाणु संयंत्र दुनिया के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में से एक था। यह कीव के उत्तर में महज 130 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। 26 अप्रैल, 1986 की वह भयानक रात, जब चेरनोबिल के रिएक्टर नंबर 4 में विस्फोट हुआ, वह इतिहास में काले अक्षरों में दर्ज हो गई।

यह दुर्घटना दुनिया की सबसे भीषण परमाणु आपदा साबित हुई। विस्फोट के बाद रेडिएशन का घना बादल उठा और पूरे यूरोप में फैल गया। हजारों लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा और कई दशकों तक उस क्षेत्र में रहना नामुमकिन हो गया। प्राणियों और पर्यावरण पर इसके दुष्प्रभाव आज तक महसूस किए जा रहे हैं।

चेरनोबिल का नाम आज भी आपदा, लापरवाही और प्रौद्योगिकी के खतरों का प्रतीक बना हुआ है। यहाँ के खंडहर आज भी उस त्रासदी की गवाही देते हैं। लंबे समय तक बंद रहने के बाद संयंत्र को 2000 में आधिकारिक तौर पर बंद कर दिया गया।

हालांकि आज चेरनोबिल एक खामोश

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