रतन टाटा दुनिया के सबसे अमीर शख्स क्यों नहीं हैं?

जब भी दुनिया के सबसे अमीर लोगों की चर्चा होती है, तो अक्सर एलन मस्क, बिल गेट्स या जेफ बेजोस जैसे उद्योगपतियों के नाम सामने आते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर रतन टाटा अपनी संपत्ति का अधिकांश हिस्सा समाज सेवा में न लगाते, तो वह आज दुनिया के सबसे अमीर इंसान होते। टाटा समूह का बिजनेस साम्राज्य पूरी दुनिया में फैला हुआ है, फिर भी रतन टाटा का नाम अरबपतियों की सूची में काफी नीचे नजर आता है।

इसकी मुख्य वजह उनकी सादगी और टाटा ट्रस्ट्स के जरिए किया जाने वाला भारी दान है। रतन टाटा और टाटा संस अपनी कंपनी में होने वाले कुल मुनाफे का लगभग 66 प्रतिशत हिस्सा ट्रस्ट में दान कर देते हैं। यह कोई हालिया फैसला नहीं है, बल्कि जब से उन्होंने टाटा समूह की कमान संभाली है, तब से वह इस परंपरा को पूरी निष्ठा से निभाते आ रहे हैं। यह राशि शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और कैंसर अनुसंधान जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में खर्च की जाती है।

रतन टाटा का मानना है कि संपत्ति का असली मूल्य इस बात से तय होता है कि उससे कितने लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। यही कारण है कि धन-दौलत जमा करने के बजाय उन्होंने हमेशा राष्ट्र निर्माण और जन कल्याण को प्राथमिकता दी है। भले ही वह आंकड़ों के मामले में दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति न हों, लेकिन अपनी उदारता और सिद्धांतों के कारण वह करोड़ों लोगों के दिलों के सबसे अमीर इंसान हैं।

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