रतन टाटा: सादगी और महादान की मिसाल

रतन टाटा भारत के उन चुनिंदा उद्योगपतियों में से हैं, जिन्हें उनकी अपार संपत्ति से ज्यादा उनकी सादगी, ईमानदारी और दरियादिली के लिए जाना जाता है। 28 दिसंबर 1937 को जन्मे रतन टाटा ने टाटा समूह को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया, लेकिन उनका मुख्य उद्देश्य हमेशा समाज का कल्याण रहा।

अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि अपार सफलता के बावजूद वे दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों की सूची में शीर्ष पर क्यों नहीं दिखते? इसका सीधा और प्रेरक जवाब यह है कि रतन टाटा अपनी कमाई का लगभग 65 फीसदी हिस्सा दान कर देते हैं। उनकी संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा टाटा ट्रस्ट्स के जरिए देश में शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और समाज सेवा के कार्यों में खर्च होता है।

उनका मानना है कि व्यापार का असली मकसद सिर्फ मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि समाज के जीवन स्तर को बेहतर बनाना है। रतन टाटा की यह परोपकारी सोच उन्हें सिर्फ एक सफल बिजनेसमैन ही नहीं, बल्कि करोड़ों दिलों पर राज करने वाला सच्चा नायक बनाती है।

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