रात के समय गाए जाने वाले भारतीय शास्त्रीय संगीत के राग

भारतीय शास्त्रीय संगीत की सबसे बड़ी खासियत इसका समय चक्र सिद्धांत है। हमारे संगीतशास्त्रियों ने दिन और रात के 24 घंटों को अलग-अलग पहरों में बाँटा है, और प्रत्येक राग का भाव मौसम तथा समय के हिसाब से तय किया गया है। जब सूरज ढलता है और शाम ढलकर रात में बदलती है, तो संगीत का माहौल भी बदलने लगता है।

रात की शुरुआत यानी रात के पहले पहर में विशेष रूप से कल्याण ठाठ के रागों का गायन-वादन किया जाता है। कल्याण परिवार के रागों को शाम और रात के शुरुआती समय के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है। इनमें राग यमन, यमन कल्याण, भूपाली, केदार, छायानत और तिलक कामोद मुख्य रूप से शामिल हैं। इसके अलावा दुर्गा, हमीर और खमाज जैसे राग भी रात के इस पहले हिस्से में श्रोताओं को शांत और गंभीर अनुभूति कराते हैं।

जैसे-जैसे रात गहरी होती जाती है, रागों का चयन भी बदलता जाता है। मध्य रात्रि और उसके बाद के समय के लिए राग बागेश्री, दरबारी कान्हड़ा, मालकौंस और बिहाग जैसे राग गाए-बजाए जाते हैं। इन रागों की गंभीर ध्वनियाँ और कोमल स्वर इंसान के मन को शांति, सुकून और एक अद्भुत आध्यात्मिक शांति का अहसास कराते हैं। यही कारण है कि रात में सुने जाने वाले राग संगीत प्रेमियों के दिलों को गहराई से छूते हैं।

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