महाभारत में राधा और उनके पुत्र कर्ण की कहानी

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब हम महाभारत में राधा का जिक्र सुनते हैं, तो यह भगवान कृष्ण की प्रिय राधा नहीं, बल्कि महाभारत के महान योद्धा कर्ण को पालने वाली माता राधा हैं। मूल रूप से कर्ण कुंती के पुत्र थे, लेकिन जन्म के बाद कुंती ने उन्हें त्याग दिया था। इसके बाद हस्तिनापुर के सारथी अधिरथ और उनकी पत्नी राधा ने कर्ण को पाया और उनका पालन-पोषण अपने सगे बेटे की तरह किया। यही कारण है कि कर्ण को राधेय (राधा का पुत्र) भी कहा जाता है। इस तरह माता राधा का नाम इतिहास में एक महान मां के रूप में अमर हो गया।

आगे चलकर जब कर्ण बड़े हुए और 'अंग' देश के राजा बने, तो उनका विवाह हुआ। कर्ण की दो पत्नियां थीं। उनकी पहली पत्नी का नाम वृषाली था, जिनसे उन्हें तीन पुत्र रत्न प्राप्त हुए—वृषसेन, सुषेण और वृषकेत। वहीं, कर्ण की दूसरी पत्नी का नाम सुप्रिया था। सुप्रिया से भी उनके तीन पुत्र हुए, जिनका नाम चित्रसेन, सुशर्मा, प्रसेन और भानुसेन था (कुछ कथाओं में नाम थोड़े भिन्न हो सकते हैं)।

इस प्रकार, यदि हम माता राधा के वंश और उनके बच्चों की बात करें, तो उनके दत्तक पुत्र कर्ण थे और आगे चलकर कर्ण के माध्यम से उनके कुल में कई पोते हुए, जिन्होंने महाभारत के युद्ध में अपनी वीरता का परिचय दिया। यह कहानी हमें सिखाती है कि माता का स्थान केवल जन्म देने से नहीं, बल्कि प्रेम से पालने से भी उतना ही ऊंचा होता है।

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