रूस और भारत की दोस्ती की शुरुआत

आजादी के शुरुआती दौर में जब पूरी दुनिया अमेरिका और सोवियत संघ के बीच बंटी हुई थी, तब भारत ने गुटनिरपेक्षता की राह चुनी। इसका मतलब था कि भारत किसी भी महाशक्ति के खेमे में शामिल नहीं हुआ, बल्कि सबके साथ संतुलित रिश्ते रखे। लेकिन भू-राजनीतिक हालात और क्षेत्रीय सुरक्षा की जरूरतों ने धीरे-धीरे दोनों देशों को एक-दूसरे के करीब लाना शुरू कर दिया।

इस रिश्ते में सबसे बड़ा मोड़ 9 अगस्त 1971 को आया, जब दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक 'भारत-सोवियत मैत्री और सहयोग संधि' (Indo-Soviet Treaty of Peace, Friendship and Cooperation) पर हस्ताक्षर हुए। यह सिर्फ कागजों पर हुआ समझौता नहीं था, बल्कि इसने दोनों राष्ट्रों के बीच कूटनीतिक, आर्थिक और सामरिक साझेदारी को मजबूत करने की नींव रखी।

शीत युद्ध के उस दौर में इस संधि ने भारत को कूटनीतिक रूप से एक बड़ा संबल दिया। समय के साथ, भले ही सोवियत संघ का विघटन हो गया और रूस उसका उत्तरधिकारी बना, लेकिन दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग का यह रिश्ता लगातार गहरा होता गया, जो आज भी समय की हर कसौटी पर खरा उतरा है।

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