रूस-यूक्रूस युद्ध और भारत
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष का असर पूरी दुनिया के साथ-साथ भारत पर भी साफ़ तौर पर देखने को मिल रहा है। इस युद्ध की वजह से वैश्विक स्तर पर ऊर्जा और खाद्य आपूर्ति की श्रृंखला प्रभावित हुई है, जिसके मिले-जुले परिणाम भारत को भी भुगतने पड़ रहे हैं।
एक तरफ इस संकट के कारण कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे भारत का आयात बिल काफी बढ़ गया है। ऊर्जा जरूरतों के लिए विदेशों पर निर्भरता के चलते देश के आर्थिक बजट पर इसका अतिरिक्त दबाव पड़ा है।
दूसरी तरफ, इस परिस्थिति ने भारत के कृषि क्षेत्र के लिए एक नया अवसर भी पैदा किया है। वैश्विक बाजार में रूस और यूक्रेन का गेहूं के कुल निर्यात में करीब उनतीस प्रतिशत हिस्सा था, जो युद्ध के कारण बाधित हो गया है। सप्लाई चेन टूटने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय गेहूं की मांग में अचानक तेजी आ गई है, जिससे भारतीय किसानों और निर्यातकों को गेंहू के निर्यात से अच्छा लाभ कमाने का मौका मिला है।
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