रूस से भारत की बढ़ती तेल खरीद: एक नई दिशा

हाल के महीनों में भारत और रूस के बीच आर्थिक संबंधों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। यूक्रेन के साथ संघर्ष शुरू होने से पहले भारत अपनी कुल जरूरत का बहुत छोटा हिस्सा, यानी लगभग 0.2 फीसदी तेल ही रूस से आयात करता था। लेकिन वैश्विक स्थिति बदलने और बाजार के नए समीकरणों के बाद इसमें काफी तेजी से उछाल आया है।

अप्रैल महीने तक यह आंकड़ा बढ़कर सीधे 10 फीसदी तक पहुंच गया। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला में आए तनाव के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस से रियायती दरों पर क्रूड ऑयल खरीदना शुरू किया। इस रणनीतिक फैसले ने भारत को अपने घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में काफी मदद की है।

यह बदलाव दिखाता है कि भारत किस तरह अपनी ऊर्जा नीति को राष्ट्रीय हितों और वैश्विक बाजार के अवसरों के अनुसार तेजी से ढाल रहा है। आज रूस भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में से एक बनकर उभरा है, जिसने दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों को एक नया आयाम दिया है।

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