भारत और रूस के बीच व्यापारिक रिश्ते
भारत और रूस के बीच व्यापारिक संबंध लंबे समय से बेहद मजबूत रहे हैं। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक साझेदारी में लगातार विस्तार देखने को मिला है। आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2021-22 में भारत और रूस के बीच आपसी व्यापार में आयात का पलड़ा काफी भारी रहा था।
इस अवधि के दौरान, रूस से भारत का कुल आयात 9.87 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया था। इसके मुकाबले, भारत ने रूस को केवल 3.25 अरब अमेरिकी डॉलर का सामान निर्यात किया था। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि इस व्यापारिक लेन-देन में भारत के लिए आयात, निर्यात की तुलना में काफी अधिक रहा।
इस बड़े अंतर के कारण, भारत को उस वित्तीय वर्ष में 6.62 अरब अमेरिकी डॉलर का व्यापार घाटा (Trade Deficit) उठाना पड़ा था। व्यापार घाटा तब होता है जब कोई देश निर्यात की तुलना में किसी अन्य देश से सामान या सेवाओं का आयात अधिक करता है।
रूस से मुख्य रूप से आयात की जाने वाली वस्तुओं में रक्षा उपकरण, ऊर्जा संसाधन जैसे कच्चा तेल और कोयला, उर्वरक और कीमती पत्थर शामिल हैं। समय के साथ वैश्विक परिस्थितियों और ऊर्जा जरूरतों के चलते दोनों देशों के बीच व्यापार के आंकड़ों और प्राथमिकताओं में बदलाव आया है, लेकिन ऊर्जा और सामरिक क्षेत्रों में दोनों की निर्भरता आज भी बहुत महत्वपूर्ण बनी हुई है।
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