“रोता क्यों है रे यह” – एक संवेदनशील पल
“रोता क्यों है रे य” – ये पंक्ति कई लोगों के दिल को छू जाती है। यह उद्धरण वास्तव में लेखक निर्मल वर्मा की रचना से लिया गया है, जहाँ एक सरल, गहरे संवेदना से भरी घटना को चित्रित किया गया है। इस पंक्ति में एक बूढ़ी दादी माँ की आवाज़ है, जो एक छोटे बच्चे – लेखक को – देखकर पूछती हैं कि वह रो क्यों रहा है।
उस पल में न सिर्फ एक दादी का प्यार झलकता है, बल्कि मानवीय सहानुभूति की गहराई भी दिखाई देती है। बच्चा रो रहा है, और दादी माँ का हृदय तुरंत उसके दर्द के प्रति संवेदनशील हो जाता है। यह प्रश्न सिर्फ एक जिज्ञासा नहीं, बल्कि एक स्नेहिल संबोधन है – जैसे कहना हो, "बेटा, क्या हुआ? क्यों दुखी हो?"
यह लाइन हमें याद दिलाती है कि बचपन में हर आँसू कोई न कोई सुनता था – अक्सर वो सुनने वाला घर की वो दादी होती थीं, जो बिना कुछ कहे, बस पास बैठकर सुकून दे देती थीं। आज के तेज रफ्तार जीवन में भी ऐसे पल हमें रोक देते है
टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।