लक्ष्मी माता की उत्पत्ति और उनके पिता की कथा

हिंदू धर्म में देवी लक्ष्मी को धन, समृद्धि और सौभाग्य की देवी माना जाता है। जब भी सुख-समृद्धि की कामना होती है, तो सबसे पहले लक्ष्मी जी का ही ध्यान किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि लक्ष्मी जी किसकी बेटी थीं? पौराणिक कथाओं में उनके जन्म को लेकर दो बेहद खास और प्रचलित मान्यताएं मिलती हैं। पहली और सबसे प्रसिद्ध कथा के अनुसार, लक्ष्मी जी महर्षि भृगु और उनकी पत्नी ख्याति की पुत्री थीं। भृगु ऋषि सप्तर्षियों में से एक थे। माता ख्याति ने भगवान विष्णु की आराधना करके एक ऐसी पुत्री का वरदान मांगा था, जो साक्षात लक्ष्मी का रूप हो। इस तरह लक्ष्मी जी ने उनके घर जन्म लिया। दूसरी और बेहद लोकप्रिय कथा समुद्र मंथन से जुड़ी है। जब देवताओं और असुरों के बीच अमृत खोज के लिए क्षीरसागर का मंथन चल रहा था, तब उस मंथन से 14 रत्न निकले थे। इन्हीं रत्नों में से एक साक्षात देवी लक्ष्मी थीं, जो दिव्य कमल पर विराजमान होकर प्रकट हुईं। चूंकि वे समुद्र से उत्पन्न हुई थीं, इसलिए समुद्र देव (सागर) को भी उनका पिता माना जाता है। इसी रिश्ते के कारण उन्हें 'सिंधुजा' (समुद्र की बेटी) भी कहा जाता है। प्रकट होने के बाद देवी लक्ष्मी ने स्वयं भगवान विष्णु का वरण किया और उनकी अर्धांगिनी बनीं। संक्षेप में कहें तो, सांसारिक रूप में वे भृगु ऋषि की संतान हैं और आध्यात्मिक व अलौकिक रूप में वे सागर की पुत्री मानी जाती हैं।

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय