नवाबों का शहर लखनऊ: इतिहास और विरासत

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, जिसे अक्सर 'नवाबों का शहर' और 'तहज़ीब का मरकज़' कहा जाता है, अपने भीतर एक बेहद समृद्ध और ऐतिहासिक विरासत समेटे हुए है। जब भी इस शहर के इतिहास और इसके निर्माण की बात आती है, तो इसके पीछे दो बेहद महत्वपूर्ण और दिलचस्प पहलू सामने आते हैं।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, लखनऊ का इतिहास रामायण काल से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि इस खूबसूरत शहर की स्थापना भगवान श्री राम के छोटे भाई लक्ष्मण जी ने की थी। शुरुआत में इस जगह को 'लक्ष्मणपुरी' या 'लखनपुरी' के नाम से जाना जाता था, जो समय के साथ बदलते-बदलते धीरे-धीरे 'लखनऊ' बन गया। आज भी शहर में स्थित लक्ष्मण टीला इस प्राचीन विरासत की गवाही देता है।

वहीं दूसरी ओर, आधुनिक लखनऊ को एक सांस्कृतिक और कलात्मक पहचान देने का श्रेय 18वीं शताब्दी में अवध के नवाबों को जाता है। नवाब आसफ़-उद्-दौला ने जब अवध की राजधानी को फैजाबाद से लखनऊ स्थानांतरित किया, तब इस शहर का स्वर्णिम युग शुरू हुआ। नवाबों ने यहाँ की वास्तुकला, संगीत, शायरी और लज़ीज़ व्यंजनों (कबाब और बिरयानी) को एक नई ऊँचाई दी। बड़ा इमामबाड़ा, छोटा इमामबाड़ा और रूमी दरवाज़ा जैसी ऐतिहासिक इमारतें आज भी नवाबों के इसी वैभवशाली काल की याद दिलाती हैं।

संक्षेप में कहें तो, लक्ष्मण जी की विरासत से शुरू हुआ यह शहर नवाबों के दौर में आकर पूरी तरह निखरा। यही वजह है कि आज का जीवंत और महानगरीय लखनऊ अपने प्राचीन गौरव और नवाबी तहज़ीब का एक अनूठा और खूबसूरत संगम पेश करता है।

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