लखनऊ की प्रसिद्ध सर्दियों की मिठास: काली गाजर का हलवा

नवाबों के शहर लखनऊ का ज़िक्र होते ही यहाँ के लज़ीज़ कबाब और नवाबी संस्कृति की याद आ जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि लखनवी खान-पान सिर्फ तीखे और चटपटे व्यंजनों तक ही सीमित नहीं है? यहाँ के मीठे व्यंजनों का भी कोई सानी नहीं है। जब बात सर्दियों के मौसम की हो, तो लखनऊ की गलियों में एक बेहद खास और अनोखा व्यंजन देखने को मिलता है, जिसे काली गाजर का हलवा कहा जाता है।

आमतौर पर हम सभी ने लाल गाजर का हलवा खूब खाया है, लेकिन लखनऊ का काली गाजर का हलवा स्वाद और रंगत दोनों में बिल्कुल जुदा होता है। यह एक दुर्लभ और पारंपरिक शीतकालीन व्यंजन है जो इस शहर की पहचान बन चुका है। गहरी बैंगनी या काली गाजर से बनने वाला यह हलवा सर्दियों के महीनों में यहाँ के बाजारों और शादियों की शान बढ़ाता है।

इसे बनाने के लिए काली गाजर को कद्दूकस करके दूध, ढेर सारे मावा (खोया), देसी घी और चीनी के साथ धीमी आंच पर घंटों पकाया जाता है। अंत में इसे काजू, बादाम और पिस्ता जैसे सूखे मेवों से सजाकर गरमा-गरम परोसा जाता है। इसका अनोखा स्वाद और मखमली बनावट मुँह में जाते ही घुल जाती है। अगर आप सर्दियों में लखनऊ की यात्रा कर रहे हैं, तो चौक या पुराने लखनऊ के बाजारों में जाकर इस पारंपरिक जायके का लुत्फ उठाना बिल्कुल न भूलें। यह स्वाद आपको सालों साल याद रहेगा।

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