लेखक के मित्र के दोषों का कैटलॉग

कभी-कभी दोस्ती में वो बातें छिपी रहती हैं जो हम जानते हैं, पर नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसा ही है लेखक की अपने एक मित्र के साथ। इस मित्र में इतने सारे दोष हैं कि उनकी सूची लगभग एक पूरी किताब जितनी लंबी है। लेखक ने मजाक में कहा है कि उनके पास दोषों का एक पूरा 'कैटलॉग' है।

कैटलॉग शब्द यहाँ बहुत महत्वपूर्ण है। यह सिर्फ एक दोष नहीं, बल्कि कई बार-बार दोहराए गए व्यवहारों की याद दिलाता है। शायद वो मित्र बहुत ज्यादा बोलता है, या वादा करके भूल जाता है, या फिर छोटी-छोटी बातों पर नाराज हो जाता है।

लेकिन फिर भी, लेखक उन्हें दोस्त रखता है। क्यों? क्योंकि दोस्ती सिर्फ बिना दोष के होने पर नहीं बनती। बल्कि, उन दोषों के बावजूद भी रिश्ता बनाए रखना ही असली दोस्ती होती है। शायद लेखक भी अपने मित्र के उन खामियों को माफ कर देता है, क्योंकि उसके अंदर कुछ अच्छाई भी होगी, जो उन सब दोषों से ज्यादा महत्वपूर्ण है।

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