शून्य विवाह क्या होता है?
शून्य विवाह वह विवाह होता है जो कानूनी रूप से प्रारंभ से ही मान्य नहीं होता। इसका मतलब यह है कि ऐसा विवाह कभी अस्तित्व में ही नहीं आता, मानो वह हुआ ही नहीं। इसे "Null" भी कहा जाता है।
उदाहरण के लिए, अगर दो ऐसे लोग शादी कर लेते हैं जिनमें से एक पहले से विवाहित है, या फिर वे ऐसे रिश्ते में हैं जिनके बीच शादी कानूनी तौर पर अनुमत नहीं है (जैसे भाई-बहन), तो ऐसा विवाह शून्य माना जाता है।
भारत में हिंदू विवाह अधिनियम और अन्य कानूनी प्रावधान बताते हैं कि कौन-सी स्थितियों में विवाह शून्य हो सकता है। ऐसे मामलों में पार्टियों को कानूनी तौर पर अलग करने की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि वह विवाह कभी मान्य ही नहीं था।
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