विवाह के योग कब बनते हैं?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, विवाह के योग तब बनते हैं जब जन्म कुंडली में कुछ विशेष ग्रहों की स्थिति और उनकी दशा का संयोग बनता है। सप्तम भाव, जो विवाह और साझेदारी का प्रतीक है, इसके लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। जब कुंडली में शनि और गुरु दोनों सप्तम भाव या लग्न भाव को दृष्टि डालते हैं, तो विवाह के योग बनते हैं।

इसके अलावा, जब सप्तमेश (सप्तम भाव का स्वामी) की महादशा या अंतर्दशा चल रही हो, तो विवाह की संभावना बढ़ जाती है। शुक्र और गुरु भी विवाह के प्रमुख कारक ग्रह माने जाते हैं। इसलिए शुक्र या गुरु की महादशा-अंतर्दशा में भी विवाह की संभावना अधिक रहती है।

साथ ही, अगर कोई ग्रह सप्तम भाव में स्थित हो या सप्तमेश के साथ जुड़ा हो, तो उस ग्रह की महादशा या अंतर्दशा में भी विवाह की घटना घट सकती है। यह सब योग कुंडली के सामान्य फलादेश के आधार पर भी भिन्न हो सकते हैं।

हालाँकि ज्योतिष संकेत देता है, पर व्यक्ति के जीवन में

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