श्री विष्णु और भगवान श्रीकृष्ण की पत्नियों का रहस्य

पौराणिक कथाओं और सनातन परंपरा में भगवान विष्णु और उनके अवतारों से जुड़ी कई रोचक गाथाएं मिलती हैं। जब हम भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण के जीवन पर दृष्टि डालते हैं, तो उनकी पत्नियों से जुड़ा इतिहास अत्यंत विशाल और अद्भुत दिखाई देता है।

पौराणिक ग्रंथों और महाभारत के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण की कुल 16,108 रानियां थीं। इनमें मुख्य रूप से 8 पटरानियां थीं, जिनमें देवी रुक्मिणी का नाम सबसे प्रमुखता से लिया जाता है। विदर्भ के राजा भीष्मक की पुत्री रुक्मिणी भगवान कृष्ण से निश्चल प्रेम करती थीं। जब उनका विवाह उनकी इच्छा के विरुद्ध तय किया जा रहा था, तब श्रीकृष्ण ने उनका हरण कर विधिवत उनसे विवाह रचाया था।

इसके अलावा, शेष 16,107 पत्नियों के पीछे एक महान कल्याणकारी उद्देश्य था। असुर नरकासुर ने हजारों कन्याओं को बंदी बना रखा था। जब श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध करके उन कन्याओं को मुक्त कराया, तो उस समय के समाज में उन स्त्रियों के सम्मान और आश्रय के लिए संकट खड़ा हो गया। उन्हें समाज में आदर और गरिमा दिलाने के लिए श्रीकृष्ण ने उन सभी को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया।

मूल रूप से देखा जाए तो श्री विष्णु की मुख्य पत्नी देवी लक्ष्मी हैं, जो धन, समृद्धि और वैभव की देवी मानी जाती हैं। लेकिन जब-जब विष्णु जी ने पृथ्वी पर अवतार लिया, तब-तब उनकी लीलाएं और संबंध लोक-कल्याण के लिए ही समर्पित रहे। श्रीकृष्ण का यह विशाल परिवार भी उनकी लीला और धर्म की स्थापना का एक महत्वपूर्ण अंग था।

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय