भगवान विष्णु की उत्पत्ति और उनका स्वरूप
सनातन धर्म और हिंदू पौराणिक कथाओं में भगवान विष्णु को सृष्टि का पालहार माना गया है। जब भी संसार में पाप और अन्याय बढ़ता है, तब वे धर्म की स्थापना के लिए विभिन्न अवतार लेते हैं। लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह जिज्ञासा उठती है कि भगवान विष्णु के माता-पिता कौन हैं या उनके पिता कौन हैं।
विभिन्न पुराणों और शास्त्रों में इस विषय को अलग-अलग दृष्टिकोण से समझाया गया है। श्रीमद्भागवत पुराण और विष्णु पुराण के अनुसार, भगवान विष्णु अजन्मा हैं, यानी उनका न तो कोई जन्म हुआ है और न ही कोई अंत। वे स्वयं नारायण हैं, जो सृष्टि के निर्माण से पहले भी अस्तित्व में थे और इसके विनाश के बाद भी रहेंगे। उन्हें स्वयंभू माना जाता है, जिसका अर्थ है जो स्वयं प्रकट हुए हों।
वहीं दूसरी ओर, शिव पुराण के अनुसार, सृष्टि के प्रारंभ में केवल निराकार ब्रह्म (सदाशिव) और शक्ति का अस्तित्व था। उनके मिलन से ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव) की उत्पत्ति हुई। इस दृष्टिकोण से भगवान शिव को उनका जनक माना जाता है।
संक्षेप में कहें तो, आध्यात्मिक और तात्विक स्तर पर भगवान विष्णु स्वयं परमेश्वर और आदि-अनादि हैं। वे पूरी सृष्टि के पिता हैं, इसलिए उनका कोई सांसारिक पिता नहीं है। वे समय और जन्म के चक्र से पूरी तरह परे हैं।
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