भगवान शंकर और माँ पार्वती का प्रेम प्रसंग

भगवान शंकर और माँ पार्वती के विवाह की कथा हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और प्रेरणादायी मानी जाती है। कहा जाता है कि माँ पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए बहुत कठिन तपस्या की। उनके प्रेम और निष्ठा से प्रसन्न होकर शिव जी ने उन्हें अपना वर मान लिया।

विवाह की तैयारियाँ आकाश से लेकर पृथ्वी तक फैली थीं। भगवान शिव ने सभी देवताओं को सुंदर वस्त्रों और आभूषणों में सजकर आने का आह्वान किया। सभी देवता इस अद्भुत मंगल मौके पर उपस्थित हुए। ब्रह्मा जी की उपस्थिति में यह विवाह संपन्न हुआ।

एक अद्भुत दृश्य था—जब माँ पार्वती और भोलेनाथ ने परस्पर वरमाला डाली। वह पल ऐसा था, जब प्रकृति और तत्वों ने भी खुशी मनाई। यह विवाह केवल एक धार्मिक समारोह नहीं, बल्कि प्रेम, समर्पण और आध्यात्मिक एकता का प्रतीक है।

आज भी इस दिन को शिव-पार्वती विवाह के रूप में उत्साह से मनाया जाता है, खासकर फाल्गुन माह के

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