प्राण कहाँ रहता है शरीर में?

हम सभी ने कभी न कभी यह सवाल ज़रूर सोचा होगा – जीवन का आधार क्या है? जब हम जागते हैं, सांस लेते हैं, चलते-फिरते हैं, तो कौन सी शक्ति हमारे भीतर जान डाले रहती है? प्राचीन ज्ञान के अनुसार, यह शक्ति प्राण है।

प्राण को हम आमतौर पर सांस के रूप में जानते हैं। वह वायु, जिसे हम नथुनों से अंदर खींचते हैं, वही प्राण है। यह केवल ऑक्सीजन नहीं है, बल्कि जीवन का वह सूक्ष्म तत्व है जो मनुष्य, पशु और सभी जीव-जंतुओं को जीवित रखता है। बिना इसके शरीर सिर्फ एक निर्जीव ढांचा रह जाता है।

प्राण का मुख्य स्थान हृदय माना गया है। यहीं से वह शरीर के हर कोने में फैलता है। जैसे धमनियों में खून का प्रवाह होता है, वैसे ही प्राण शरीर के भीतर एक अदृश्य धारा की तरह बहता है। प्राणायाम जैसे साधनाओं के माध्यम से इसे नियंत्रित करने की क्षमता भी मनुष्य में होती है।

इसलिए प्राण सिर्फ एक शारीरिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि जीवन की आत्मा के निक

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