शेषनाग का जन्म और कद्रू का वरदान
शेषनाग का जन्म प्राचीन पुराणों के अनुसार एक दिव्य और रहस्यमय घटना है। कहा जाता है कि कश्यप ऋषि और उनकी पत्नी कद्रू के यहाँ एक बड़ी घटना घटी। कद्रू ने ब्रह्मा से वरदान मांगा कि वे सहस्रों पराक्रमी सर्पों की माता बनें। उनकी इच्छा पूरी हुई और उन्होंने 1000 अंडे दिए। वहीं, उनकी बहन विनता ने केवल दो अंडे दिए।
जैसे-जैसे समय बीता, कद्रू के अंडों से 1000 सांपों का जन्म हुआ, जिनमें से कई नागों का उल्लेख पुराणों में मिलता है — जैसे वासुकी, तक्षक, पद्म, धृतराष्ट्र, शंखपाल, कालिक, कंबल, शेष और अनेक अन्य। इनमें शेषनाग विशेष स्थान रखते हैं। वे नागों के राजा माने जाते हैं और भगवान विष्णु के शयन के लिए आधार बनते हैं।
शेषनाग को अनादि और अनंत कहा गया है — जो न तो कभी उत्पन्न हुए और न ही कभी लुप्त होंगे। हालाँकि पौराणिक कथाओं में उनका जन्म कद्रू के अंडों से बताया गया है, पर उनकी महिमा इतनी अधिक है कि वे खुद एक द
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