श्रुति मंत्र और ब्रह्म का परम सत्य
सनातन दर्शन में श्रुति मंत्रों का विशेष महत्व है। ये वेदों के वे अमर वचन हैं जिन्हें ऋषियों ने ध्यान की उच्चतम अवस्था में साक्षात अनुभव किया था। ये मंत्र हमें इस ब्रह्मांड और जीवन के सबसे मौलिक रहस्य से परिचित कराते हैं।
श्रुति मंत्रों के अनुसार, परब्रह्म ही इस पूरी सृष्टि का अंतिम और एकमात्र स्रोत है। इस जगत में जो कुछ भी विद्यमान है, वह उसी परम चेतना से उत्पन्न होता है। वही इस संपूर्ण संसार को संचालित और सम्भालता है। अंत में, समयचक्र पूरा होने पर सब कुछ उसी अनंत ब्रह्म में पुन: समाहित हो जाता है।
यही प्रकृति का शाश्वत नियम है। उत्पत्ति, स्थिति और लय का यह चक्र बिना रुके निरंतर चलता रहता है। जब कोई व्यक्ति इस सत्य को गहराई से समझ लेता है, तो उसे यह अहसास होता है कि हम सभी उसी एक परम सत्ता के अभिन्न अंग हैं।
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