संगीत की उत्पत्ति और सिंधु घाटी सभ्यता
संगीत की जड़ें मानव इतिहास के बहुत गहरे पन्नों में समाई हुई हैं। माना जाता है कि भारत में संगीत का प्रारम्भ सिंधु घाटी की सभ्यता के काल में हुआ था। यह प्राचीन सभ्यता न केवल अपनी उन्नत नगर नियोजन प्रणाली के लिए जानी जाती है, बल्कि कला और सांस्कृतिक समृद्धि में भी इसका कोई सानी नहीं था।
इस काल में संगीत के अस्तित्व के सबसे मजबूत साक्ष्य पुरातत्वविदों को खुदाई के दौरान मिले। इनमें सबसे प्रमुख है कांस्य से बनी नृत्य बाला की मूर्ति। इस अद्भुत मूर्ति की भंगिमा और शारीरिक मुद्रा से यह स्पष्ट रूप से प्रतीत होता है कि उस युग में संगीत, ताल और नृत्य लोगों के जीवन का अभिन्न हिस्सा थे।
इसके अलावा, ऐतिहासिक अनुसंधानों से पता चलता है कि उस समय नृत्य, नाटक और संगीत के देवताओं की पूजा करने का प्रचलन था। यद्यपि उस काल के लिखित संगीतात्मक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, फिर भी ये पुरातात्विक अवशेष और परंपराएं इस बात की गवाही देती हैं कि भारतीय संगीत की सुरीली यात्रा की शुरुआत इसी महान सभ्यता से हुई थी।
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