भारतीय संगीत का मूल उद्देश्य और उसकी आध्यात्मिक शक्ति
प्राचीन समय से ही संगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि मानव जीवन को ईश्वर से जोड़ने का एक पवित्र मार्ग रहा है। हमारे प्राचीन प्राच्य मनीषियों और ऋषियों का मानना था कि इस समस्त सृष्टि की उत्पत्ति 'नाद' यानी दिव्य ध्वनि से हुई है। इसी नाद से संगीत का जन्म हुआ, जिसका मूल उद्देश्य आत्मा को परमात्मा से मिलाना तथा मोक्ष की प्राप्ति कराना था।
भारतीय संगीत के प्राण इसके राग और सुर हैं। ये राग केवल सुनने में मधुर नहीं होते, बल्कि हमारे मन और मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव डालते हैं। संगीत के माध्यम से मनः शांति मिलती है और यह योग तथा ध्यान साधना में एकाग्रता बढ़ाने में अत्यंत सहायक सिद्ध होता है। प्राचीन काल से ही मानव संगीत की इस मोहक और आध्यात्मिक शक्ति से प्रेरित और प्रभावित होता आया है।
आधुनिक दौर में भी संगीत की उपयोगिता कम नहीं हुई है। आज चिकित्सा विज्ञान भी यह स्वीकार करता है कि संगीत में मानसिक रोगों और तनाव को दूर करने की अद्भुत क्षमता है। शास्त्रीय रागों के सही उच्चारण और श्रवण से मानसिक संतुलन प्राप्त होता है। इस प्रकार, संगीत का वास्तविक उद्देश्य मनुष्य को आंतरिक शांति प्रदान करते हुए उसके जीवन को अध्यात्म और कल्याण की ओर ले जाना है।
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